March 26, 2026

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कोयला माफियाओं के इशारे पर कोरबा के हरदीबाजार पुलिस की द्वेष पूर्ण कार्यवाही से परेशान हो रहे हैं राष्ट्रवादी पत्रकार।राजेश मेहरा व सहयोगियों की हत्या के नीयत से हमला कराने वाले माफियाओं पर कब होगी एफआईआर,कोरबा पुलिस इतनी मेहरबान क्यों?

प्रखर राष्ट्रवाद न्यूज कोरबा – छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के हरदी बाजार चौकी अंतर्गत ग्राम मल गांव में अवैध कोयला का काला कारोबार चरम पर है,23 मार्च को रिपोर्टिंग के लिए ग्राउंड जीरो पर पंहुचे दैनिक नव ऊर्जा समाचार पत्र के ब्यूरो प्रमुख प्रखर राष्ट्रवाद न्यूज (वेब पोर्टल)के ऑनर राष्ट्रवादी पत्रकार राजेश मेहरा व सहयोगी रानू भारती,पवन चौहान,आशीष डी मेघा,अरुण कुमार राठिया पर हत्या की नीयत से कोयला माफियाओं व उनके सहयोगियों द्वारा उग्र होकर जानलेवा हमला किया गया था।


जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को इस खौफनाक घटना की जानकारी त्वरित देने पर भी पुलिस प्रशासन गंभीर रूप से घायल पत्रकारों की किसी भी प्रकार से कोई आपेक्षित सहयोग नहीं की। वरन बड़ी मुश्किल में कोयला माफियाओं से जान बचाकर आए पत्रकारों पर ही अवैध कोयला तस्करों के इशारों पर छेड़छाड़ व अन्य धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर दिया गया।

                 कोरबा पुलिस व जिला प्रशासन अवैध कोयला चोरों को संरक्षण दे रही है,पीड़ित पत्रकार राजेश मेहरा व सहयोगियों को न्याय देने के बजाय अपराधी बनाकर प्रताड़ित कर रही है,न्याय पाने के लिए परेशान पत्रकार ठोकरें खा रहे हैं,  

वायरल वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि ग्राउंड जीरो पर रिपोर्टिंग करने गए पत्रकारों पर हत्या की नीयत से कोयला के अवैध कारोबारियों व 200 /300 सहयोगियों द्वारा जिस तरह से हमला किया था यह दर्दनाक,खौफनाक,अकल्पनीय व भयावह है,10 सेकेंड में जीवन और मृत्यु का खतरनाक दृश्य दिखा है।

      राष्ट्रवादी पत्रकार राजेश मेहरा व सहयोगियों पर हुए अमानवीय अत्याचार,हत्या करने की साजिश रच कर किए गए हमले से कोरबा पुलिस किसी भी प्रकार से अनभिज्ञ नहीं है।

सारी सत्यता से जानकार होने के पश्चात भी अनजान बनकर घोर लापरवाही पूर्वक राष्ट्रवादी पत्रकार व सहयोगियों पर ही गंभीर धाराओं के तहत् अपराध दर्ज किया जाना,
कोरबा पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह है,पुलिस की गतिविधि को शर्मसार करने वाली है,पुलिस की इसी प्रकार द्वेष पूर्ण कार्यवाही के लिए जनता इन्हे कानून का रक्षक नहीं भक्षक कहती है,पुलिस द्वारा पीड़ित पत्रकारों पर ही इस प्रकार की कार्यवाही से साफ नजर आता है कि माफियाओं के साथ संलिप्तता है,पीड़ित राष्ट्रवादी पत्रकारों पर ही ष ड यंत्र पूर्वक गंभीर अपराध दर्ज करने में पुलिस ने इतनी जल्दबाजी दिखाई है कि जनता सब समझ चुकी है,कोरबा पुलिस से जनता की पुलिस के प्रति विश्वास को खोया है।

  कानून के रक्षक बनकर जो पुलिस अपनी खाकी का रुतबा गरीबों, पीड़ितों,असहायों पर दिखाती है वह माफियाओं के चरण चुम्बन करती नजर आ रही है,माफियाओं के समक्ष घुटने टेक  रही है।

राष्ट्रवादी पत्रकार राजेश मेहरा व सहयोगी रानू भारती,पवन चौहान, आशीष डी मेघा, अरुण कुमार राठिया की सुनियोजित षडयंत्र पूर्वक हत्या कराने की नीयत से जानलेवा हमला कराने वाले अवैध कोयला माफिया गुलशन जायसवाल,प्रहलाद सिंह, बॉबी राठौर,प्रमोद,महेश यादव,दिलराज सिंह,अंजोर सिंह व अन्य पर कोरबा पुलिस अपराध दर्ज कर कब करेगी कार्यवाही? अभी
तक क्यों इन माफियाओं पर एफआईआर तक नहीं किया गया है ?क्यों पुलिस इन्हे बचाने का पूर्ण प्रयास कर रही है?

क्या कारण है कि केंद्र सरकार को प्रतिदिन करोडों रुपयों के राजस्व कि क्षति पहुंचाने वाले इन रसूखदार अवैध कोयला तस्करों पर छत्तीसगढ़ सरकार, कोरबा पुलिस प्रशासन,जिला प्रशासन हाथ डालने से बच रहे है,क्यों
इन पर शासन प्रशासन मेहरबान हैं।

यह आश्चर्य है कि अवैध कोयला कारोबार व तस्करी करने वालों की खुलासा करने ग्राउंड जीरो पर पहुंचे राष्ट्रवादी पत्रकार राजेश मेहरा व सहयोगियों की हत्या करने की षडयंत्र रचकर हमला करने/कराने वाले कोयला चोर गुलशन जायसवाल,प्रहलाद सिंह,बॉबी राठौर,प्रमोद,महेश यादव,दिलराज सिंह,अंजोर सिंह व अन्य के संबंध में पुलिस को सम्पूर्ण जानकारी होने के पश्चात भी अब तक एफआईआर दर्ज कर किसी भी प्रकार से कोई कार्यवाही नहीं किया गया है,पुलिस द्वारा कोयला माफियाओं को पूर्ण रूप से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस प्रशासन के गैर जिम्मेाराना रवैए की पुष्टि इस बात से होती है कि पीड़ित राष्ट्रवादी पत्रकार राजेश मेहरा व सहयोगियों की हत्या कराने की नीयत से जानलेवा हमला करने व कराने वालों पर किसी प्रकार से कोई कार्यवाही न कर पीड़ित पत्रकारों को ही रकम उगाही करने गए थे कहकर बदनाम करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा जा रहा है।
राजेश मेहरा के द्वारा लगातार कोयला तस्करों के विरुद्ध खबर प्रकाशित किया जा रहा था,पूर्व में जनवरी 2022 में कोरबा जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर कोयला माफियाओं के विषय में नामजद शिकायत किया गया था,

कि मल गांव सहित जिले में चल रहे अवैध कोयला के कारोबार पर शीघ्र लगाम लगाया जाए,एवम् अवैध कोयला तस्करों पर कठोर कार्रवाई किया जाए,जिस पर कोयला तस्करों का राष्ट्रवादी पत्रकार राजेश मेहरा से रंजिश रखना आम बात थी,

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला प्रशासन,पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को देखकर लगता है कि यहां “लॉ एंड ऑर्डर”की स्थिति बेहद चिंता जनक है।

राष्ट्रवादी पत्रकार राजेश मेहरा ने कहा कि

छत्तीसगढ़ के कोरबा में भारत के सबसे बड़े कोयला खदान हैं,यहां छत्तीसगढ़ के नेताओं,जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, एस ई सी एल,अवैध कोयला माफियाओं की मिली भगत से केंद्र सरकार को प्रतिदिन करोड़ो रूपए की क्षति हो रही है,
कोयला तस्करी को उजागर करने ग्राउंड जीरो पर रिपोर्टिंग करने पहुंचे,हमारी ही हत्या का पूर्ण प्रयास किया गया,पुलिस द्वारा हमें ही अपराधी बनाकर प्रताड़ित किया जा रहा है, परंतु ष ड यंत्र कारियों पर किसी भी प्रकार से कोई कार्यवाही किया जाना घोर निंदनीय है,पुलिस,और जिला प्रशासन घोर लापरवाह हैं,कोरबा जिले में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति दयनीय है।

राजेश मेहरा ने कहा हम छत्तीसगढ़ सरकार,कोरबा जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन से पूछते हैं-

आखिर किसके संरक्षण से जिले में अवैध कोयला का काला कारोबार फल फूल रहा है?

आखिर किसके इशारे पर बिना कानून के भय के केंद्र की संपत्तियों को तहस नहस किया जा राह है?

केंद्र की संपत्ति का जिस प्रकार से खुला दोहन हो रहा है उसका जिम्मेदार कौन है?

आखिर कौन लोग हैं,जिनके इशारे पर इतने वृहद स्तर पर काले हीरे की तस्करी किया जा रहा है? आखिर माफियाओं द्वारा इतने बड़े पैमाने पर अवैध कोयला कहां खपाया जाता है।

छत्तीसगढ़ के कोरबा में केंद्र की सम्पत्ति काले हीरे का खुला दोहन,काला बाजारी कब तक चलेगा?

आखिर किसके कहने पर कोयला माफियाओं द्वारा राष्ट्रवादी पत्रकार राजेश मेहरा व सहयोगियों की हत्या का सुनियोजित ष ड यंत्र रचा गया था?

क्यों पुलिस प्रशासन,जिला प्रशासन कोयला माफियाओं के समक्ष घुटने टेकने को मजबूर हैं?

कोरबा पुलिस द्वारा क्यों ष ड यंत्र पूर्वक राष्ट्रवादी पत्रकार व सहयोगियों पर छेड़ छाड़ व अन्य गंभीर धाराओं के तहत् अपराध पंजीबद्ध किया गया?

पुलिस द्वारा क्यों सुनियोजित तरीके से राष्ट्रवादियों को झूठे मामले में फंसाकर रिपोर्टिंग करने नहीं रकम उगाही करने गए थे कहकर बदनाम व प्रचारित किया जा रहा है?

क्यों कोरबा पुलिस अब तक कोयला माफियाओं व उनके सहयोगियों पर किसी भी प्रकार से कोई कार्यवाही नहीं कर पा रही है?

लोकतंत्र के चौथे आधार स्तम्भ को किसके इशारे पर, किनके संरक्षण में,किसके कहने पर कुचला जा रहा है?

क्या कोरबा पुलिस द्वारा जानबूझकर ष ड यंत्र पूर्वक पत्रकार राजेश मेहरा व सहयोगियों पर किया गया झूठा,बेबुनियाद एफआईआर वापस लिया जाएगा?

क्या राष्ट्रवादी पत्रकार राजेश मेहरा व सहयोगियों को छत्तीसगढ़ सरकार न्याय देगी?

राष्ट्रवादी पत्रकार राजेश मेहरा ने कहा
आखिर क्यों अपने आपको कोरबा के वरिष्ठ पत्रकार कहने वाले महानुभाव,मीडिया का एक वर्ग अपने कर्तव्यों का पालन करने के बजाए राष्ट्रवादी पत्रकार राजेश मेहरा को कथित पत्रकार साबित करने में अपनी ऊर्जा का सदुपयोग कर रहे हैं?जिन्हें लगता है हम कथित हैं वह स्वतंत्र पूर्वक कार्यवाही करें।

हम डंके की चोट पर कहते हैं कि हम राष्ट्रवादी पत्रकार हैं,राष्ट्र धर्म सर्व प्रथम की बात करते हैं,
हम पत्रकारिता राष्ट्रहित,मातृभूमि की सेवा व जनता की सेेवा करते हुए जनाकांक्षाओं पर खरा उतरने के लिए करते हैं न कि चाटुकारी करने के लिए।
सरकार,प्रशासन,पुलिस की चाटुकारी हमारे स्वाभिमान के खिलाफ है।

हम छत्तीसगढ़ सरकार,कोरबा जिलाधीश जी,पुलिस अधीक्षक जी से आग्रह,अपेक्षा,व मांग करते हैं कि पत्रकार राजेश मेहरा व सहयोगियों पर ष ड यंत्र पूर्वक हत्या करने की साजिश रचकर जानलेवा हमला करने/कराने वालों व पीड़ित पत्रकारों पर ही छेड़ छाड़,अन्य गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किए जाने की न्यायिक जांच कर दोषियों पर अपराध पंजीबद्ध कर विधि सम्मत कार्यवाही करें एवम्
पत्रकार राजेश मेहरा व सहयोगियों पर किया गया झूठा,मिथ्या एफ आई आर वापस लेंंंं
एवम् पीड़ित पत्रकारों को न्याय दिलाने का कष्ट करें।

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